गुरुवार 25 जून 2026 - 22:08
क्या मोहर्रम में बहने वाला यही लहू किसी मासूम की ज़िंदगी भी बचा सकता है?

क्या मोहर्रम में बहने वाला यही लहू किसी मासूम की ज़िंदगी भी बचा सकता है?

9 मोहर्रम को लखनऊ में कुछ ऐसा हुआ जिसने हुसैनियत की नई तस्वीर पेश कर दी...

करबला के तीन दिन के भूखे-प्यासे 72 शहीदों की याद में हजारों अज़ादारों ने इंसानियत के नाम अपना लहू समर्पित किया। 191 यूनिट रक्तदान कर यह संदेश दिया कि हुसैनियत का असली पैग़ाम इंसानियत को ज़िंदगी देना है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, करबला के तीन दिन के भूखे-प्यासे 72 शहीदों की याद में हजारों अज़ादारों ने इंसानियत के नाम अपना लहू समर्पित किया। 191 यूनिट रक्तदान कर यह संदेश दिया कि हुसैनियत का असली पैग़ाम इंसानियत को ज़िंदगी देना है।

आफताब-ए-शरीयत मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नकवी की दर्दभरी मजलिस के बाद उमड़ा यह इंसानियत का कारवां हर दिल को छू गया। इमाम-ए-ज़माना (अ) के नायब आयतुल्लाह सैयद अली सिस्तानी के भारत स्थित प्रतिनिधि कार्यालय के सवाल-जवाब शोबे के इंचार्ज मौलाना सैयद अली हाशिम आब्दी ने सबसे पहले रक्तदान कर इस मिशन की शुरुआत की, वहीं काकोरी के शिक्षक महेंद्र कुमार ने भी रक्तदान कर गंगा-जमुनी तहज़ीब और इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश की।

सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब बड़ी संख्या में कनीज़ान-ए-सैयदा ने भी हज़रत ज़ैनब (स) की याद में रक्तदान कर अपना नज़राना-ए-अकीदत पेश किया।

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